वीर सावरकर की किताब को लेकर विवाद

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नई दिल्ली : वीर सावरकार जो की सामाजिक कार्यकर्त्ता थे ,राजनीती से जुड़े थे उन्होंने वकालत भी की थी और लेखक भी थे जो हिन्दू पक्ष के बारे में लिखते थे. पर 26 फरवरी 1966 में , उनकी मृत्यु हुयी और आज भी उनको लेकर विवाद और राजनीती गहमागहमी रहती है जो सियासत के लोग चलाते है.
कल कांग्रेस सेवादल ,मध्यप्रदेश द्वारा एक किताब का विमोचन किया गया जिसमे उनके ऊपर लिखा गया की , सावरकर जी के नाथूराम गोडसे से सेम्लेंगिक सम्बन्ध थे. जिसके बाद ही विवाद उठा और भारतीय जनता पार्टी ने इससे अभद्र और निंदनीय कहा ,और कहा की उद्धव ठाकरे जी को इस किताब पर महाराष्ट्र में बैन लगा देनी चाहिए | सावरकर जी के पोते ने भी इस पर विरोध किया है,सौर निशाना साधा है.

संजय राउत का बयान

शिवसेना संसद संजय राउत ने कहा की एक वर्ग के लोग की यह सोच है और स वीर सावरकर जी एक महा व्यक्ति थे ,और रहेंगे. वो कुछ लोगो की दिमागी गन्दगी को दिखाता हैं “जो लोग सावरकर जी के बारे में ऐसा बोल रहे हैं उनके दिमाग की जांच की जानी चाहिए. फिर चाहे वो महाराष्ट्र हो या देश का कोई हिस्सा हर कोई सावरकर जी पर गर्व करता है. जो लोग इस तरह की बातें करते हैं, उनका दिमाग गंदगी से भरा है”. और उन्होंने कहा की यह किताब महाराष्ट्र मई नहीं आएगी यह मध्यप्रदेश की गन्दगी है. आपको बता दे की महाराष्ट्र में शिवसेना ,कांग्रेस ,एनसीपी का गत बंधन है जो की इस विवाद से तूल पकड़ सकता है.

 

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