विलफुल डिफॉल्टर पर वसूले गए 7,600 करोड़ रुपये

0
55

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में देश में विलफुल डिफॉल्टर यानी जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाले लोगों-कंपनियों की संख्या में करीब 60 फीसदी की बढ़त हुई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है. मोदी प्रथम सरकार के पहले साल यानी वित्त वर्ष 2014-15 के अंत में देश में विलफुल डिफॉल्टर्स की संख्या 5,349 थी, लेकिन वित्त वर्ष 2018-19 के अंत यानी गत मार्च तक यह संख्या बढ़कर 8,582 तक पहुंच गई. वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि इन विलफुल डिफॉल्टर से 7,600 करोड़ रुपये की वसूली भी की जा चुकी है. संसद के निचले सदन लोकसभा में सीतारमण ने एक सवाल के लिखित जवाब से यह भी साफ किया कि विलफुल डिफॉल्टर ‘ऐसे व्यक्ति को कहते हैं जिसके पास लोन चुकाने का संसाधन तो होता है, लेकिन वह जानूबूझ कर नहीं चुकाता और कर्ज में हासिल पैसे को कहीं और इस्तेमाल करता है.’ उन्होंने बताया कि सिक्यूरिटाइजेशन ऐंड रीकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स ऐंड इनफोर्समेंट ऑफ सिक्यूरिटी इंट्रेस्ट एक्ट, 2002 के प्रावधानों के तहत 6,251 मामलों में कार्रवाई की गई. इसके तहत ही 31 मार्च 2019 तक सार्वजनिक बैंकों ने 8,121 मामलों में कर्ज वसूली के लिए मामला दायर किया है. रिजर्व बैंक के निर्देश के मुताबिक 2,915 मामलों में एफआईआर दर्ज किए गए हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here