अलविदा 2019…शह-मात का चला खेल, गठबंधन के सहारे कांग्रेस ने की सत्ता में वापसी

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लोकसभा चुनाव 2019 की आहट के साथ शुरू हुआ यह साल आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावी की गहमागहमी के बीच अलविदा कह रहा है…तो वहीं इस साल जहां एक ओर लोकसभा चुनाव में जीत के साथ बीजेपी सरकार ने सत्ता में फिर से वापसी की, तो वहीं विधानसभा चुनावों में बीजेपी कई जगह सिमटती नजर आई…ये पूरा साल राजनीति के नजरिये से चुनावों की वजह से सियासी उठापटक के साथ चलता रहा…वहीं पार्टियों के साथ ही नेताओं के बीच भी इस साल शह-मात का दौर जारी रहा…जहां इस साल के अंत में झारखंड में केसरिया परचंम सिमटा, तो वहीं दिल्ली में आप का बोलबाला और धुआधार खेल जारी है।

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इस साल की शुरूआत लोकसभा चुनाव में बीजेपी की धुंआधार जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी की वापसी के साथ हुई है…जहां इस जीत के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने जहां एक ओर सत्ता में फिर से वापसी की, तो वहीं उन्होंने इस बार अपनी सत्ता के धुरंधरे के कार्यभार में काफी बड़ा फेर बदल किया…जिसे जहां एक ओर देश ने तो अपना लिया, लेकिन शायद यह उनके राजनीतिक दौर को वह रास नहीं आया, जिसके चलते उनका बांय हाथ कहे जाने वाले अमित शाह को एक बार फिर गृहमंत्री होने के साथ-साथ पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष का पदभार संभालना पड़ा।  तो वहीं दूसरी ओर इस साल में कांग्रेस की सियासी जमीन कुछ जरूर मजबूत हुई है, लेकिन वह पूरे वर्ष आंतरिक गुटबाजी से जूझती रही…लोकसभा के बाद एक बार फिर से दिल्ली की तीनों प्रमुख पार्टियां विधानसभा चुनाव की तैयारी में व्यस्त हैं…बात साल भर की चुनावी उठापटक की करे, तो 71 प्रतिशत राज्यों में फैल चुकी बीजेपी विधानसभा चुनाव में साल का अंत आते आते तह 41 प्रतिशत पर सिमटती दिखी, तो वहीं कांग्रेस ने पहले महाराष्ट्र और और उसके बाद साल के अंत में झारखंड में गठबंधन के साथ सरकार बनाई…हालांकि दोनों ही राज्यों में मुख्यमंत्री कांग्रेस पार्टी का नहीं रहा।

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साल का अंत आने और विधानसभा चुनाव 2019 के तहत शह-मात के खेल के लिए खेल रही आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में लोक लुभावन का दौर शुरू किया…जिसके तहत आप सरकार मुफ्त बिजली, पानी और महिला बस यात्र, बुजुर्गों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा जैसी लोक लुभावन फैसलों के सहारे अपनी सत्ता बचाने में लगी हुई है…वहीं मतदाताओं से अरविंद केजरीवाल सरकार के काम के आधार पर समर्थन मांग रहे है, जिसके लिए चुनावी रणनीति तैयार करने में पार्टी जनता दल यूनाइटेड के नेता प्रशांत किशोर की भी मदद मांगी है…तो वहीं दूसरी ओर भाजपा अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीरण, जहां झुग्गी वहीं मकान को मुद्दा बना कर लोगों को लुभाने में जुटी है…जिसके तहत 22 दिसंबर को रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के साथ ही पार्टी ने चुनाव प्रचार का आगाज कर दिया…इस दौरान दिल्ली विधानसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर को चुनाव प्रभारी बनाया गया है…और केंद्रीय राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी व नित्यानंद राय सह प्रभारी हैं…इसके अलावा कांग्रेस 2013 के बाद एक बार फिर दिल्ली की सत्ता में वापसी को लेकर नए-नए पैतरे आजमाने में लगी है…जिसके तहत वह 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने वाली शीला दीक्षित के कार्यकाल की उपलब्धियों को आधार बनाकर अपनी खोई हुई सियासी जमीन हासिल करने के लिए जद्दोजहद कर रही है…इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी के बाद अपने स्थापना दिवस पर कांग्रेस ने रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली के साथ चुनावी तैयारी को गति दी…रैली को सोनिया व राहुल गांधी ने संबोधित किया था…व इसके अलावा इस रैली में पार्टी के सभी दिग्गज नेता मौजूद रहे…

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